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🧵 परिचय
डिशॉम गुरुजी के नाम से चर्चित, शिबू सोरेन 1944 में रामगढ़, बिहार (अब झारखंड) में जन्मे एक प्रमुख जनजातीय नेता थे। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की और पूर्ण राज्यhood आंदोलन को दिशा दी। जुर्म और जेल की लंबी लड़ाईयों के बाद भी उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।(Wikipedia)
🗳️ राजनीतिक सफर और उपलब्धियां
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तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री (2005, 2008–09, 2009–10) रहे।(Wikipedia)
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लोकसभा से दमका का प्रतिनिधित्व 1980–84, 1989–98, 2002–19 तक किया।(Wikipedia)
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केंद्रीय मंत्री (कोयला विभाग) के रूप में तीन बार कार्य किया।(Wikipedia)
💉 स्वास्थ्य संकट और निधन
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जून 2025 में दिल्ली के श्री गंगा राम अस्पताल में इलाज शुरू हुआ, मुख्यतः किडनी संबंधी समस्या के लिए।(india.com)
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29 जून को तीन दिनों की बेहोशी के बाद होश आया; तब उसकी स्थिति स्थिर रही और उन्होंने ICU में भोजन लेना प्रारंभ किया।(The Times of India)
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2 अगस्त को विंध्वत स्थिति की खबरें आईं; तब वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे।(The Times of India, The Economic Times)
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अंततः 4 अगस्त, 2025 को वे 81 वर्ष की आयु में दुनिया से विदा हो गए। उनका निधन JMM अध्यक्ष एवं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा पुष्ट किया गया।(India Today)
📜 राजनीतिक विरासत और प्रभाव
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JMM की स्थापना और दशकों तक नेतृत्व: सोरेन ने जनजातीय अधिकारों के लिए संघर्ष किया और झारखंड गठन आंदोलन की अग्रणी भूमिका निभाई।(Wikipedia, Wikipedia)
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विरासत आगे बढ़ाते परिवार के सदस्य: उनके बेटे हेमंत सोरेन, वर्तमान मुख्यमंत्री हैं, जबकि छोटे बेटे बसंत सोरेन भी जगा लोक राजनीति में सक्रिय हैं।(Wikipedia)
🙏 प्रतिक्रिया और श्रद्धांजलि
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मंत्री, नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
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झारखंड के कई स्थानों पर, विशेषकर सामाजिक-धार्मिक स्थलों पर JMM कार्यकर्ताओं ने उनकी तस्वीर के सामने पूजा अर्चना की।(Navbharat Times)
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जनजातीय समुदायों और राज्य के लोगों ने सोशल मीडिया पर भावनात्मक संदेश भेजे; हेमंत सोरेन ने लिखा: “Respected Guru Dishom has left us. Today, I have become empty…”(indianexpress.com)
✍️ निष्कर्ष
शिबू सोरेन केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, वे झारखंड आंदोलन के मार्गदर्शक और आदिवासी अधिकारों के संरक्षक थे। उनका निधन भारतीय राजनीति में एक युग का समापन है। उनकी भूमिका झारखंड को आज़ाद राज्य बनाने में अहम रही, और उनकी विरासत सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणा बनी रहेगी।




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