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पाकिस्तानी सैनिक का चौंकाने वाला खुलासा: सेना ने छोड़ा मरने के लिए
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक पाकिस्तानी सैनिक कैमरे के सामने रोते हुए अपनी ही सेना और सरकार के खिलाफ दर्द और आक्रोश व्यक्त कर रहा है। वीडियो में सैनिक ने कहा है कि उसकी सेना उसे अपने ही सैनिक नहीं मानती और उसे मौत के खतरों में अकेला छोड़ दिया गया है।
इस वीडियो में यह सैनिक अपनी व्यथा साझा करते हुए कहता है कि उसे बचाने की जिpम्मेदारी उसकी सेना की है, क्योंकि उसने सेना में भर्ती होने का फ़ैसला उनके निर्देश पर ही किया था। सैनिक अपने पास मौजूद आर्मी आईडी कार्ड और अन्य दस्तावेज़ दिखाते हुए यह सवाल करता है कि किस तरह सेना उसे "अपने बंदे नहीं" मान सकती है।
सैनिक ने अपनी बातों में यह भी बताया कि उसका परिवार मुश्किल हालात में है। उसके घर पर एक विकलांग पिता है और वह परिवार का इकलौता कमाने वाला है। उसे डर है कि अगर सेना ने उसे सुरक्षा नहीं दी तो उसके परिवार पर गंभीर असर पड़ेगा। यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि सैनिक अपनी सुरक्षा और परिवार की जिम्मेदारी को लेकर बेहद चिंतित है।
विशेष रूप से ध्यान देने वाली बात यह है कि इस वीडियो में सैनिक ने खुलकर अपनी सेना की आलोचना की। उसने कहा कि जब उसके साथी सैनिक बलूचों या अन्य आतंकवादी समूहों द्वारा मार दिए जाते हैं, तो पाकिस्तानी सेना कभी भी अपने सैनिकों के शव उठाने नहीं आती। यह बात इतिहास में भी देखी जा चुकी है।
उदाहरण के लिए, कारगिल युद्ध के दौरान भी पाकिस्तानी सेना अपने सैनिकों का सम्मान नहीं कर पाई थी। उस समय भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों के शवों को सम्मानपूर्वक दफनाया, जबकि पाकिस्तान ने अपने सैनिकों की रक्षा या उनके शवों की देखभाल नहीं की। इस नए वीडियो में सैनिक ने इसी पर अपनी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि यह रवैया उसकी सेना के अंदरूनी हालात को दर्शाता है।
वीडियो में यह भी बताया गया कि वर्तमान समय में बलूच अलगाववादियों के कब्जे में सात पाकिस्तानी सैनिक हैं। बलूच समूह ने पाकिस्तानी सेना को चेतावनी दी है कि अगर उनके लोग नहीं छोड़े गए, तो ये सात सैनिक भी खतरे में रहेंगे। इस अल्टीमेटम के बावजूद पाकिस्तानी सेना ने जवाब दिया कि "हमें अपने सैनिक नहीं चाहिए, जो करना है कर लो।" इस जवाब ने सैनिक को हताश कर दिया और उसने कैमरे के सामने आकर अपनी व्यथा बयान की।
सैनिक ने कहा कि उसने सेना में भर्ती होने का फ़ैसला अपनी मर्जी से नहीं किया था। उसने दिखाया कि उसके पास आर्मी कार्ड और पर्सनल आईडी कार्ड हैं, जो पाकिस्तान ने उसे दिए थे। उसने सवाल उठाया कि अगर वही सेना उसे मरने के लिए छोड़ देती है, तो यह न्याय संगत कैसे हो सकता है। सैनिक का रो-रो कर कहना यह दर्शाता है कि उसे अपने अधिकार और सुरक्षा के लिए कितना संघर्ष करना पड़ रहा है।
वीडियो में सैनिक ने पाकिस्तान की सेना की उस मानसिकता को भी बेनकाब किया, जो अपने ही सैनिकों को "लावारिस" मानती है। उसने यह स्पष्ट किया कि मौत के डर से सैनिक अपने ही देश की सेना से मदद मांगने को मजबूर है। यह वीडियो न केवल एक व्यक्तिगत दर्द को दर्शाता है, बल्कि पाकिस्तान की सैन्य नीतियों और अपने सैनिकों के प्रति रवैये पर भी सवाल उठाता है।
वीडियो देखकर यह साफ हो जाता है कि सैनिकों के हितों की अनदेखी करने वाली यह व्यवस्था उनके जीवन और परिवारों के लिए गंभीर खतरा है। सैनिक ने यह भी कहा कि उसने अपने जीवन को खतरे में डालने के बावजूद अपनी जिम्मेदारी निभाई, लेकिन अब वह अकेला छोड़ दिया गया है।
सामाजिक मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और दर्शकों में गहरा प्रभाव डाल रहा है। कई लोग इसे पाकिस्तान की सेना की आंतरिक कमजोरियों और सैनिकों के प्रति उदासीनता का उदाहरण मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे वीडियो देश की सैन्य नीतियों और उनके मानव संसाधन प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाते हैं।
यह घटना हमें यह भी याद दिलाती है कि सैनिक सिर्फ इकाइयों का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उनके परिवार और व्यक्तिगत जीवन भी सुरक्षा और सम्मान के हकदार हैं। इस वीडियो ने पाकिस्तान की सेना के अंदरूनी हालात को सबके सामने ला दिया है और यह दिखाया है कि सैनिकों की सुरक्षा और उनकी मानवीय जरूरतें अक्सर नजरअंदाज की जाती हैं।
अंततः यह वीडियो न केवल सैनिक की व्यक्तिगत कहानी है, बल्कि यह पाकिस्तान की सेना की संरचना और सैनिकों के साथ व्यवहार पर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ भी है। यह दर्शाता है कि जब सैनिक अपने जीवन की सुरक्षा के लिए मदद मांगते हैं, तो उन्हें अपने ही संगठन से जवाब नहीं मिलता।
संपूर्ण वीडियो का संदेश स्पष्ट है: सैनिकों को केवल निर्देशों के अनुसार काम करने वाला उपकरण नहीं माना जा सकता। उनके जीवन और परिवार के प्रति भी जिम्मेदारी निभाना हर सेना की प्राथमिकता होनी चाहिए। यह घटना पाकिस्तान की सेना की मानवीय नीतियों और सैनिकों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़ा करती है।




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