Ad

असम विधानसभा चुनाव 2026: 102 उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले, ADR रिपोर्ट से खुलासा



गुवाहाटी: असम में 9 अप्रैल 2026 को होने वाले एक चरण के विधानसभा चुनाव से पहले उम्मीदवारों के शपथपत्रों ने एक बार फिर राजनीति में आपराधिक मामलों के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।

Association for Democratic Reforms (ADR) और Assam Election Watch की 31 मार्च 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषण किए गए 722 उम्मीदवारों में से 102 उम्मीदवार (करीब 14%) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जबकि 82 उम्मीदवार (लगभग 11%) गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं।

किन पार्टियों के उम्मीदवारों पर सबसे ज्यादा केस?

रिपोर्ट के अनुसार प्रमुख राजनीतिक दलों में:

  • All India United Democratic Front (AIUDF) के 37% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले
  • Indian National Congress के 28% उम्मीदवार
  • Bharatiya Janata Party के 9% उम्मीदवार

इससे साफ है कि विभिन्न दलों में उम्मीदवार चयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। Raijor Dal के अध्यक्ष और सिबसागर के विधायक अखिल गोगोई ने अपने हलफनामे में 21 लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। इनमें साजिश, हिंसा भड़काने और मानहानि जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। हालांकि, अब तक किसी भी मामले में उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है।अखिल गोगोई की पहचान एक जमीनी कार्यकर्ता के रूप में रही है। उन्होंने किसान संगठन KMSS के जरिए भूमि अधिकार, बड़े बांधों के विरोध और RTI जैसे मुद्दों पर आंदोलन किए और बाद में राजनीति में प्रवेश किया। Badruddin Ajmal का मामला AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल, जो इस बार बिन्नाकांडी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, ने अपने हलफनामे में एक आपराधिक मामला घोषित किया है।वे एक प्रसिद्ध व्यवसायी और धार्मिक विद्वान भी हैं और 2005 में राजनीति में आए थे। उनकी पार्टी अल्पसंख्यक समुदायों के मुद्दों को उठाने के लिए जानी जाती है। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma का रिकॉर्ड | असम के मौजूदा मुख्यमंत्री और जलुकबाड़ी से भाजपा उम्मीदवार हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने 2026 के नामांकन में कोई भी लंबित आपराधिक मामला नहीं बताया है।

हालांकि, उनके खिलाफ पुराने मामलों में वे पहले ही अदालत से बरी हो चुके हैं। उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू होकर कांग्रेस और फिर भाजपा तक पहुंचा है। Shiladitya Dev भी चर्चा मेंहोज़ाई से भाजपा उम्मीदवार शिलादित्य देव ने अपने हलफनामे में करीब 13 आपराधिक मामलों की जानकारी दी है।इनमें से अधिकांश मामले राजनीतिक विरोध प्रदर्शन और सभाओं से जुड़े बताए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकतर मामलों का संबंध:

  • राजनीतिक प्रदर्शन
  • भाषण या विरोध
  • जन आंदोलनों

भारतीय कानून के अनुसार, केवल मामला दर्ज होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं होता, लेकिन फिर भी यह मुद्दा चुनावी बहस का अहम हिस्सा बना रहता है।9 अप्रैल 2026 को मतदान होना है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड को कितना महत्व देते हैं और विकास, स्थानीय मुद्दों तथा नेतृत्व को किस तरह प्राथमिकता देते हैं। इस रिपोर्ट में दी गई सभी जानकारी उम्मीदवारों द्वारा चुनाव आयोग को सौंपे गए शपथपत्रों और ADR की 31 मार्च 2026 की रिपोर्ट पर आधारित है।

Post a Comment

0 Comments